पर्यावरण नहीं, अस्तित्व का प्रश्न है वनों का संरक्षण
भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे पर्व और उत्सव केवल सामाजिक उल्लास के अवसर नहीं रहे बल्कि प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व के प्रतीक भी रहे हैं। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण, प्रदूषण और जल संकट जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत में 1 से 7 जुलाई तक मनाया जाने वाला ‘वन महोत्सव’ केवल वृक्षारोपण का अभियान नहीं है बल्कि पृथ्.....
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