बदलते वक्त की मांग है हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने के बारे में सोचना
राष्ट्रीय राजनीति की अपनी चिंताएं हैं, जबकि सूबाई राजनीति की अपनी दुश्चिंताएं! लोकतांत्रिक सियासत में इनमें तालमेल बिठाना वाकई दुष्कर कार्य है, क्योंकि राष्ट्रीय हितों के ऊपर कहीं साम्प्रदायिक, कहीं जातीय और कहीं क्षेत्रीय हितों को हावी किया जाता रहा है और ऊटपटांग वकालत की जाती रही है। ऐसे में हरेक सिक्के के दो पहलु की तरह ही इन्हें भी लिए जाने की जरूरत है और हमारे समग्र राष्ट्रीय हित कैसे सध.....
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