अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। महंत धर्मदास ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों, विशेषकर चंपत राय पर तीखे प्रहार करते हुए गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। महंत धर्मदास ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को ‘मंदिर’ के बजाय ‘बनिया की दुकान’ करार दिया है।
महंत धर्मदास ने कहा कि चंपत राय ने स्वयं को कार्यकर्ता के बजाय ‘मालिक’ के रूप में स्थापित कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर चल रहे कार्यों में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और जमीन खरीद में बड़ा घोटाला किया गया है। महंत ने सवाल उठाया कि चंपत राय ने व्यक्तिगत नाम से जमीनें क्यों खरीदीं और नजूल की जमीन बिना सरकारी अनुमति के कैसे ली गई?
उन्होंने आगे दावा किया कि राम मंदिर निर्माण से जुड़ी 75% गतिविधियों में लूट और कमीशनबाजी का खेल चला है। उन्होंने कहा, “नृपेंद्र मिश्रा ने जो कहा, वह सच है, लूट तो हुई है।” महंत के अनुसार, मंदिर में सामान लाने से लेकर निर्माण कार्य तक हर जगह व्यवस्था में धांधली की गई। चंपत राय पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनके बिना अनुमति के पत्ता भी नहीं हिल सकता था।
महंत धर्मदास ने गोविन्द देव गिरी पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे केवल कथावाचक हैं और व्यवस्था संभालने के लिए सक्षम नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अब चोरी का पैसा आना बंद हो गया है, इसलिए तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ भी कम हो गई है। महंत की मांग है कि पूरे ट्रस्ट को भंग कर दिया जाए और इसमें शामिल सभी लोगों को तुरंत हटाया जाए, क्योंकि ये सभी केवल सत्ता के भूखे हैं। यह बयान अयोध्या के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। फिलहाल, ट्रस्ट की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
