राम मंदिर चढ़ावा कांड की ‘इनसाइड स्टोरी’: संघ-VHP की अंतर्कलह ने खोला करोड़ों के गबन का राज!

राम मंदिर चढ़ावा कांड की ‘इनसाइड स्टोरी’: संघ-VHP की अंतर्कलह ने खोला करोड़ों के गबन का राज!

अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की धनराशि में हुए करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला अब महज एक आर्थिक अनियमितता या चोरी की घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली हलकों की अंदरूनी खींचतान और सत्ता संघर्ष का एंगल भी सामने आ रहा है। सूत्रों से प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े दो प्रमुख धड़ों के बीच लंबे समय से चल रही असहजता और ट्रस्ट पदाधिकारियों के अत्यंत करीबी रहे कुछ लोगों के रामजन्मभूमि परिसर में लगातार बढ़ते ‘दखल’ को लेकर गहरी नाराज़गी व्याप्त थी। यही अंदरूनी टकराव अंततः चढ़ावा गबन के इस बड़े खेल के उजागर होने का कारण बना।

बाथरूम तक में मिले थे नकद रुपये, फिर भी नहीं कराई गई एफआईआर

सूत्र बताते हैं कि मंदिर परिसर स्थित यात्री सुविधा केंद्र में नकद रुपयों की हेराफेरी करते हुए कुछ कर्मचारी रंगे हाथों पकड़े भी गए थे। इतना ही नहीं, सुविधा केंद्र के बाथरूम तक में गड्डियों में बंधे नकद रुपये बरामद हुए थे, लेकिन इसके बावजूद ट्रस्ट प्रबंधन ने न तो इसकी औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई और न ही मामले को गंभीरता से लिया। इसी लापरवाही और एक गुट द्वारा मामले को दबाने के प्रयास से क्षुब्ध होकर दूसरा गुट सक्रिय हो गया।

अखिलेश यादव के ट्वीट से सार्वजनिक हुआ मामला

बताया जा रहा है कि इसके बाद मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुँचाई गई। अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर पूरे प्रकरण को सार्वजनिक कर दिया, जिसके बाद यह मामला सियासी हलकों और मीडिया की सुर्खियों में आ गया। एक बार मामला सार्वजनिक होने के बाद परत-दर-परत खुलासे होने लगे और संदिग्ध कर्मचारियों, उनके सुनियोजित नेटवर्क, अर्जित की गई बेनामी संपत्तियों और उन्हें मिल रहे कथित संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जाँच का दायरा बढ़ा, अब संरक्षण और अंदरूनी संघर्ष पर भी नज़र

अब इस पूरे प्रकरण की जाँच का दायरा केवल धनराशि की हेराफेरी तक सीमित नहीं रह गया है। जाँच एजेंसियाँ अब यह भी गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध खेल लगातार चलता रहा और प्रभावशाली लोगों के बीच चल रहा अंदरूनी संघर्ष कैसे इस पूरे गबन प्रकरण के सार्वजनिक उजागर होने की वजह बना। फिलहाल ट्रस्ट की ओर से इस आंतरिक खींचतान वाले एंगल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सियासी गलियारों में यह मामला लगातार गरमाया हुआ है।

Leave a Reply

Required fields are marked *