केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 13 जून को कांग्रेस के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि वह केंद्र से मिली बड़ी मदद को विकास कार्यों में बदलने में नाकाम रही है। उन्होंने अहम इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में देरी के लिए प्रशासनिक अक्षमता और दूरदर्शिता की कमी को जिम्मेदार ठहराया। शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नड्डा ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य को हर संभव मदद दी है, लेकिन राज्य प्रशासन ने इन संसाधनों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं किया है।
उन्होंने मोदी के कार्यकाल के दौरान BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार की उपलब्धियों पर ज़ोर दिया और बताया कि हिमाचल प्रदेश की जनता ने लगातार तीन आम चुनावों में सभी चार लोकसभा सीटों पर BJP उम्मीदवारों को चुनकर पार्टी के विकास के नज़रिए पर अपनी मुहर लगाई है। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के नतीजों का ज़िक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि ये नतीजे राज्य में कांग्रेस सरकार के प्रति जनता की बढ़ती नाराज़गी को दर्शाते हैं।
नड्डा ने हिमाचल प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में विस्तार से बताया। इसमें स्पेशल असिस्टेंस स्कीम के तहत 2,381 करोड़ रुपये, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) से 2,006 करोड़ रुपये और 2024-25 के दौरान बाहरी मदद वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 2,150 करोड़ रुपये शामिल हैं। उन्होंने 40,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा लागत वाले नेशनल हाईवे और 2,911 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड फंड से चल रहे रेलवे प्रोजेक्ट्स जैसे कामों का भी ज़िक्र किया।
हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में बात करते हुए नड्डा ने आरोप लगाया कि काफ़ी फ़ंड मिलने के बावजूद, राज्य सरकार प्रोजेक्ट्स को ठीक से आगे नहीं बढ़ा पाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत मंज़ूर किए गए पंद्रह क्रिटिकल केयर ब्लॉक में से सिर्फ़ एक ही पूरा हो पाया है। इसी तरह, बारह इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी में से सिर्फ़ एक ही चालू है, और मंज़ूर की गई 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में से एक भी पूरी नहीं हुई है।
