अंडरवर्ल्ड पर बड़ी स्ट्राइक: दाऊद का करीबी सलीम डोला इस्तांबुल में गिरफ्तार, भारत लाया गया

अंडरवर्ल्ड पर बड़ी स्ट्राइक: दाऊद का करीबी सलीम डोला इस्तांबुल में गिरफ्तार, भारत लाया गया

भारतीय खुफिया एजेंसियों को संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी माने जाने वाले सलीम डोला को तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में गिरफ्तार करने के बाद भारत भेज दिया गया है। डोला की यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और भारतीय खुफिया इकाइयों के सफल तालमेल का परिणाम है। अधिकारियों के अनुसार, तुर्की में हिरासत में लिए जाने के बाद डोला को आज सुबह एक विशेष विमान से दिल्ली लाया गया। इसके बाद उसे दिल्ली के टेक्निकल एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया, जहाँ खुफिया एजेंसियाँ उससे पूछताछ कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई भारतीय खुफिया इकाइयों और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच करीबी सहयोग से पूरी की गई, जिसके चलते उसे इस्तांबुल से भारत भेजा जा सका।




दिल्ली में शुरुआती पूछताछ के बाद, डोला को आगे की जाँच और कानूनी कार्रवाई के लिए मुंबई पुलिस को सौंपे जाने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि डोला के दाऊद इब्राहिम के आपराधिक नेटवर्क से लंबे समय से संबंध रहे हैं, और भारत में उसके आने से संगठित अपराध गिरोहों से जुड़ी चल रही जाँच में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।





भारत-तुर्की संधि


भारत और तुर्की ने 2001 में हस्ताक्षरित एक प्रत्यर्पण संधि के माध्यम से आतंकवाद और सीमा पार अपराधों से निपटने में सहयोग के लिए एक औपचारिक कानूनी ढाँचा स्थापित किया। इस समझौते को बाद में मंजूरी मिली और जून 2002 में यह लागू हो गया।




इस संधि पर 29 जून 2001 को भारत के तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी और तुर्की के न्याय मंत्री हिकमत सामी तुर्क ने हस्ताक्षर किए थे। यह दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।




इस समझौते के तहत, दोनों देशों ने ऐसे व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करने पर सहमति जताई, जिन पर ऐसे अपराधों का आरोप है या जिन्हें ऐसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है, जिनके लिए उनके संबंधित कानूनों के तहत कम से कम एक वर्ष की कैद की सजा का प्रावधान है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए बनाया गया था कि अपराधी दोनों देशों के बीच आवाजाही करके न्याय से बच न सकें।




प्रत्यर्पण संधि के अलावा, भारत और तुर्की ने दिसंबर 2012 में एक और समझौता भी किया था। यह अलग व्यवस्था दोषी कैदियों के हस्तांतरण पर केंद्रित थी, जिससे उन्हें कुछ शर्तों के तहत अपने गृह देशों में अपनी सजा काटने की अनु

मति मिल सके।












Leave a Reply

Required fields are marked *