गोलमाल भई गोलमाल , स्वास्थ्य महकमे वाले मालामाल , चॉकलेट बनाने वाली फर्म को लैब उपकरण आपूर्ति का ठेका देकर किया कमाल

गोलमाल भई गोलमाल , स्वास्थ्य महकमे वाले मालामाल , चॉकलेट बनाने वाली फर्म को लैब उपकरण आपूर्ति का ठेका देकर किया कमाल

गोलमाल है भई सब गोलमाल है 

हरदोई के स्वास्थ्य विभाग के सरपरस्तों ने चॉकलेट और पेस्ट्री बनाने वाली फर्मों को लैब उपकरणों की supply का ना केवल ठेका दे दिया बल्कि भुगतान भी कर दिया , नियम कानूनों की धज्जियां ही उड़ा दीं एक तरह से ( जाहिर है फ्री में तो उड़ाई नही होंगी ) ।

अब ऊपर से जांच का आदेश आया है फर्मों की लिस्ट के साथ , तत्कालीन सीएमओ और तत्कालीन क्षय रोग अधिकारी आरोपों के घेरे में हैं , मामला मैनेज न हुआ तो कार्यवाई तगड़ी होगी , अनियमितताएं तगड़ी हैं । 

गोलमाल मई महीने में हुआ है , एक बात और गौरतलब है नियम कानून लोक लाज को धता बताते हुए जिन फर्मो को ठेका दिया गया उनमें से अधिकतर फर्मों का पता मेरठ जिले का है , इम्पार्टेंट ये नही है कि फर्म मेरठ की थीं इम्पार्टेंट ये है कि जिन श्रीमान सीएमओ ने ठेका दिया उनका नाम रोहताश कुमार है और वो मेरठ के ही रहने वाले हैं।

 मतलब समझिये ठेका एक सीएमओ ने दिया , भुगतान दूसरे सीएमओ ने किया जो कि प्रभारी सीएमओ थे अब तक धीरेंद्र सिंह । रोहताश कुमार रिटायर हो गए , धीरेंद्र सिंह इसी गड़बड़झाले का भुगतान करके आरोपों के घेरे में आये और हटा दिए गए वो भी अत्यंत ही कठोर भाषा वाले आदेश पत्र के माध्यम से एक तरह से बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले टाइप ।

बड़ा वाला इम्पार्टेंट तथ्य ये है कि क्षय रोग अधिकारी अखिलेश बाजपेयी के दस्तखत टेंडर फाइनल होने वाले कागज पर भी थे और भुगतान करने वाले कागज पर भी पर ये ढेर पउआ वाले निकले , उन्हें एक और कमाऊ चार्ज से नवाज़ दिया गया बजाय कार्यवाई के ।

अब आलम ये हैं कि पूर्व सीएमओ रोहताश कुमार चैन से हैं as always , पूर्व प्रभारी सीएमओ धीरेंद्र सिंह बीमार हो गए हैं , खबर लिखे जाने तक अस्पताल में भर्ती थे , जिनके पटल पर गड़बड़ हुई शुरू से आखिर तक के कागज़ों में जिनके दस्तखत थे वो बेधड़क हैं अब भी । कागज ऊपर से आ रहा है , नीचे दब जा रहा है , मामला मैनेज कराया जा रहा है । बहुत ही अद्भुत है महकमा ये , जिला ये , प्रदेश ये ।

खंज़र सूत्र


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