लखनऊ विश्वविद्यालय का 65वां कॉन्वोकेशन:15 साल बाद मंच पर बुलाकर दिए गए 189 मेधावियों को मेडल

लखनऊ विश्वविद्यालय का 65वां कॉन्वोकेशन:15 साल बाद मंच पर बुलाकर दिए गए 189 मेधावियों को मेडल

LU यानी लखनऊ विश्वविद्यालय का आज 65वां दीक्षांत समारोह चल रहा है। 102 साल के इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह यूनिवर्सिटी के दूसरे कैंपस यानी न्यू कैंपस में हो रहा है।15 साल बाद मंच पर बुलाकर सभी 189 मेधावियों को मेडल दिए गए। इससे पहले केवल टॉपर्स को ही मंच पर मेडल दिए जाते थे। समारोह की शुरुआत घड़े में जल भर कर किया गया। जल संचयन के प्रति जागरूक किया गया।

सर्वोच्च चांसलर मेडल एलएलबी ऑनर्स की राजश्री लक्ष्मी, चक्रवर्ती गोल्ड पीएचडी उग्रसेन वर्मा को दिया गया। इस दौरान LU के एलुमनाई और पुणे के डॉ. संजय सिंह को मानद उपाधि भी दी गई। ISRO के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कृष्णा स्वामी कस्तूरीरंगन भी शामिल हुए। अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। इसके अलावा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और रजनी तिवारी भी मौजूद हैं।

LU की एजुकेशन क्वालिटी पूरे देश मे सबसे अच्छी

कुलपति आलोक कुमार राय ने कहा, हमारे विश्वविद्यालय के कुल छात्रों में 50 फीसदी से ज्यादा छात्राएं हैं। दीक्षांत समारोह में भी सबसे ज्यादा संख्या लड़कियों की ही है। विश्वविद्यालय ने NAAC से A++ का ग्रेड मिला है। ये साबित करता है कि यहां की एजुकेशन क्वालिटी पूरे देश मे सबसे अच्छी है। नवीन परिसर में बने गंगा छात्रावास का उद्घाटन भी हुआ।

यूनिवर्सिटी की पढ़ाई से ही स्टूडेंट का फ्यूचर डिसाइड होता है: डॉ. संजय

लखनऊ यूनिवर्सिटी के बेहद उम्दा माने जाने वाले M.Sc. बायो केमिस्ट्री के स्टूडेंट रहे संजय सिंह के पिता प्रो. बीके पीएन सिंह यूनिवर्सिटी में फिजिक्स के प्रोफेसर रहे। यही कारण रहा कि 1978 से 1996 तक लगभग 27 साल यहीं रहना हुआ। M.Sc. के बाद CDRI से Ph.d. पूरा की और साल 2000 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका जाने का अवसर मिला। 2006 में वापस आकर पुणे में जिनोवो बायो फार्मास्युटिकल्स की स्थापना हुई।

संजय सिंह की अगुवाई में मलेरिया, HPV, ट्यूबर क्लोसिस की वैक्सीन के अलावा कोरोना की RNA बेस्ड वैक्सीन विकसित करने में शोध जारी है। डॉ. संजय इंडो-यूएस वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम (VAP) के इनवाइटेड मेंबर हैं। डॉ. संजय कहते हैं कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई से ही स्टूडेंट का फ्यूचर डिसाइड होता है। मेरी कामयाबी में यूनिवर्सिटी का बहुत बड़ा योगदान है और अभी भी बहुत कुछ यूनिवर्सिटी के लिए और यहां के स्टूडेंट्स के लिए करना चाहता हूं। उन्हें आज मानद उपाधि दी जाएगी।

दीक्षांत समारोह में छात्राओं का रहा दबदबा

आकांक्षा वर्मा (8 पदक, एमए गृह विज्ञान)- कुंवर राम बहादुर शाह गोल्ड, बिशम्भर नाथ गोल्ड, बिश्वेश्वर नाथ गोल्ड, चांसलर सिल्वर, शांति देवी मेमारियल गोल्ड आदि।

अमृता श्रीवास्तव (8 पदक एमए आईएएच)- श्रीनिवास वर्दाचारियार गोल्ड, पंडित किशन नारायण वंतू, पंडित महराज किशन गोल्ड, त्रिलोकी नाथ गुरु मेमोरियल गोल्ड, राय बहादुर गोल्ड मेडल, उत्पल्सना-सचिदानन्द बुक प्राइज।

प्रियमवदा शुक्ल (8 पदक लॉ)- महावीर प्रसाद श्रीवास्तव गोल्ड, द्वारिका प्रसाद निगम गोल्ड मेडल, प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया, डा. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल गोल्ड आदि।

निधि तिवारी, एमएससी, प्रज्ञा यादव एमएससी को सात पदक दिए जाएंगे।

आकांक्षा वर्मा को मिल 9 पुरस्कार

समारोह में 189 पदक में सबसे ज्यादा 9 पुरस्कार यानी 8 पदक और एक प्राइज मनी, एमए (गृह विज्ञान) की छात्रा आकांक्षा वर्मा को दिया गया। वहीं एमए (एमआईएच) की अमृता श्रीवास्तव और लॉ की छात्रा प्रियमवदा शुक्ला को 8 पदक मिले।

एमएससी फिजिक्स की छात्रा निधि तिवारी और एमएससी की प्रज्ञा यादव को 7 पदक मिले। एमए संस्कृत के चंदन यादव, एमए हिंदी की प्रिया सिंह, एमए समाज कार्य की अन्विषा सागर पांडे, एमए हिस्ट्री की छात्रा रोली यादव, एमपीए की छात्रा यशी नेगी और एमएससी की दीपाली तिवारी को 4-4 पदक दिए गए।

NEP पर पूरी तरह अमल में लाने में लग जाएंगे 10 साल : कस्तूरीरंगन

इसरो के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कृष्णा स्वामी कस्तूरीरंगन का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह लागू करने में दस वर्ष लग जाएंगे। कस्तूरीरंगन एनईपी ड्राफ्ट कमेटी के चेयरमैन भी रहे हैं। एलयू के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे कस्तूरीरंगन ने कहा कि भारत हमेशा से शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा है। प्राचीन काल में पूरे विश्व से छात्र नालंदा सहित अन्य विश्वविद्यालयों में अध्ययन करते थे। हमारी शिक्षा पद्धति बाहरी देशों की शिक्षा व्यवस्था से अच्छी थी।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर साल 2014 से ही काम करना शुरू कर दिया था। उस वक्त तत्कालीन मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्र सरकार का विशेष सहयोग मिला। नई शिक्षा नीति युवाओं को उनके मन मुताबिक पढ़ाई का अवसर देती है। वह आसानी से अपनी रुचि अनुसार पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकेंगे। जिससे उन्हें न सिर्फ रोजगार की प्राप्ति होगी बल्कि वह नये आयामों को भी छू सकेंगे।


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