शरद यादव का अंतिम संस्कार आज:भोपाल पहुंची पार्थिव देह; दिग्विजय सिंह पैतृक गांव आंखमऊ तक जाएंगे

शरद यादव का अंतिम संस्कार आज:भोपाल पहुंची पार्थिव देह; दिग्विजय सिंह पैतृक गांव आंखमऊ तक जाएंगे

पूर्व केंद्रीय मंत्री और JDU (जनता दल) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव की पार्थिव देह दोपहर 12 बजे भोपाल पहुंची। दिल्ली से चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए पार्थिव देह को भोपाल लाया गया। स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह श्रद्धांजलि देंगे। जयवर्धन सिंह, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामायण सिंह पटेल भी पहुंचे हैं।

पार्थिव देह को सड़क मार्ग से पैतृक गांव आंखमऊ ले जाया जाएगा। दिग्विजय सिंह भी आंखमऊ तक जाएंगे। दिग्विजय सिंह ने जब नर्मदा परिक्रमा की थी, उस वक्त शरद यादव भी उनकी परिक्रमा में शामिल हुए थे। शरद यादव का गुरुवार को 75 साल की उम्र में दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था।

भोपाल में शव वाहन बदला गया

भोपाल से शरद यादव की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव तक ले जाने के लिए पहले मारुति ईको गाड़ी बुक की गई थी, लेकिन ये गाड़ी छोटी होने की वजह से इसे सजवाया नहीं गया। अब टवेरा कार बुलाई गई है। नगर निगम की ओर से भी तीसरा शव वाहन पहुंचा है। कांग्रेस के प्रदेश संगठन महामंत्री राजीव सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा भी स्टेट हैंगर पहुंचेंगे।

तीन राज्यों में राजनीति की, गांव से विशेष लगाव रहा

शरद यादव MP के नर्मदापुरम के माखननगर ब्लॉक के छोटे से गांव आंखमऊ में जन्मे। जबलपुर से राजनीति शुरू की और उत्तर प्रदेश और बिहार में भी काम किया। लेकिन, उनका अपने पैतृक गांव से लगाव उतना ही था। उन्हें जब भी मौका मिलता था वो अपने गांव आते रहते थे। वे यहां किसी सामान्य व्यक्ति की तरह आकर लोगों से मिलते थे।

उनके दोस्त कहते हैं कि वे बचपन से ही साहसी और निडर थे। 12 साल की उम्र में उन्होंने गांव के कुएं में कूदकर महिला की जान बचाई थी। उनकी याददाश्त के इतनी पक्की थी कि बचपन के मित्रों को कभी नहीं भूले थे। ऐसी ही शरद यादव के बचपन से जुड़े अनसुनी कहानियां हमने उनके बचपन के मित्र, बड़े भाई से सुनी।

शरद यादव के बचपन के मित्र सराफा व्यापारी रमेश चंद सोनी निवासी माखननगर (आंखमऊ) ने बताया कि शरद की याददाश्त बेजोड़ थी। वे कभी किसी को भूलते नहीं थे। करीब 20 साल पुरानी बात है, जब शरद बिहार से गांव आए थे। मैं और वो माखननगर में एक दुकान पर बैठे थे। मोहनलाल हलवाई शख्स हमारे सामने खड़े थे। मैंने शरद से पूछा कि इसे तुम जानते हो, तो शरद ने कहा था कि मैं तो जानता हूं, ये मोहनलाल है, लेकिन यह मुझे नहीं पहचानता। फिर हमने मोहनलाल से कहा था कि इन्हें जानते हो। उन्होंने कहा नहीं।

बचपन से साहसी थी शरद यादव

रमेश चंद ने बताया कि 6वीं-7वीं क्लास की बात है। जब हम करीब 11-12 साल के थे। तब गांव में कसेरा मोहल्ला में अस्पताल के पास स्थित एक कुआं था। उसमें एक महिला गिर गई थी। शरद ने बिना कुछ-समझे सीधे छलांग लगा दी थी। उस महिला को बाहर लाकर जान बचाई थी। वे शुरू से ही साहसी और निडर थे।।

आंखमऊ के 74 साल के बुजुर्ग गुरुदयाल यादव ने बताया हम शरद यादव को भैया जी कहकर संबोधित करते थे। मैं उनसे उम्र में छोटा था। उनके घर कई साल से काम कर रहा हूं। भैया जी जब भी बिहार से गांव आते थे हमसे प्रेम से बातचीत करते थे। बैठाकर हालचाल लेते और समझाते थे। वे राष्ट्रीय नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद उनका स्वभाव में परिवर्तन नहीं दिखा। वे मृदुल स्वभाव, हंसमुख और मिलनसार थे


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