राजस्‍थान विधानसभा चुनाव से पहले बदलाव की आहट तो नहीं है यह जुगलबंदी, क्‍या हैं सियासी मायने?

 राजस्‍थान विधानसभा चुनाव से पहले बदलाव की आहट तो नहीं है यह जुगलबंदी, क्‍या हैं सियासी मायने?

जयपुर. राजस्‍थान में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. राजनीतिक पार्टियों ने अंदर ही अंदर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है. प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस और भाजपा की सियासी गतिविधियां बढ़ने वाली हैं. सत्‍तारूढ़ कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि पार्टी हाईकमान अभी भी गहलोत और पायलट गुट के बीच बढ़ी दूरियों को पाटने में नकाम रहा है. दोनों खेमों के बीच खींचतान का दौर लगातार जारी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2023 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की बागडोर‍ किसके पास होगी? सचिन पायलट को कांग्रेस का झंडा थमाया जाएगा या फिर अशोक गहलोत ही अगुआई करेंगे. बता दें कि राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा पर हैं. इस दौरान एक ऐसी तस्‍वीर सामने आई है, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. तो क्‍या इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी का शीर्ष नेतृत्‍व सचिन पायलट पर भरोसा जताएगा?

दरअसल, 4 दिसंबर 2022 को जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने राजस्‍थान में प्रवेश किया था तो कांग्रेस के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी कड़वाहट को कम करने की भरपूर कोशिश की थी. राहुल गांधी ने मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट का हाथ पकड़ कर दोनों को आदिवासियों के साथ डांस करवाया. इसके बाद दोनों को रोजाना यात्रा की शुरुआत के वक्त से ही साथ लेकर चलते रहे थे. भारत जोड़ो यात्रा के दौरान रात्रि विश्राम के वक्‍त भी सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट राहुल गांधी के साथ मौजूद रहते थे. हिमाचल प्रदेश में सुक्‍खू सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी दोनों नेताओं के संग मंच पर मौजूद थे. हालांकि, राजस्‍थान कांग्रेस के दो दिग्‍गजों के बीच कितनी नजदीकी बढ़ी है यह तो वक्‍त ही बताएगा.

राहुल गांधी-सचिन पायलट की जुगलबंदी?

दिलचस्‍प बात यह है कि सचिन पायलट को भारत जोड़ो यात्रा के अभी तक के तकरीबन हर पड़ाव पर राहुल गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हुए देखा गया है. राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा दिल्‍ली और हरियाणा के बाद फिलहाल पंजाब में है. यहां भी राहुल के साथ सचिन पायलट को देखा गया. दोनों वरिष्‍ठ नेता आपस में मंत्रणा करते हुए देखे गए. कांग्रेस पार्टी और सचिन पायलट ने खुद इससे जुड़ी तस्‍वीरें सोशल साइट पर साझा की हैं. ऐसे में सबके मन में एक ही कौतूहल है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान क्‍या राजस्‍थान की सियासत छाई हुई है? क्‍या सचिन पायलट आगामी विधानसभा चुनाव में नेतृत्‍वकर्ता की भूमिका में नजर आएंगे? हालांकि, इन सभी सवालों का जवाब भविष्‍य के गर्भ में छुपा है, जिसका आने वाले समय में ही जवाब मिलेगा. हालांकि, राहुल गांधी और सचिन पायलट की तस्‍वीरों को देखकर गहलोत कैंप की धड़कनें जरूर बढ़ती होंगी.

सचिन पायलट करेंगे रैली

कड़ाके की सर्दी में राजस्‍थान कांग्रेस में ऊपर से सबकुछ कूल-कूल जरूर दिखाई पड़ रहा है, लेकिन राजनीतिक गुटबाजी की आंच अभी मंद नहीं पड़ी है. गहलोत और पायलट खेमों के बीच खींचतान लगातार जारी है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पायलट कैंप अब बिगुल फूंकने वाला है. बताया जाता है कि सचिन पायलट प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों में 5 रैलियां और रोड शे करेंगे. राजस्‍थान का बजट तैयार करने में जुटे सीएम गहलोत की नजर पायलट के कदम पर जरूर होगी. बता दें कि ऑब्‍जर्वर के तौर पर राजस्‍थान पहुंचे मल्लिकार्जुन खड़गे (अब कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष) और अजय माकन ने गहलोत कैंप को लेकर आलाकमान को कोई अच्‍छी रिपोर्ट नहीं सौंपी है.

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