New Delhi: क्या मिडटर्म चुनाव के नतीजों से ठप होगी बाइडन सरकार? ओबामा और ट्रंप सरकार भुगत चुकी है ये परिणाम

New Delhi: क्या मिडटर्म चुनाव के नतीजों से ठप होगी बाइडन सरकार? ओबामा और ट्रंप सरकार भुगत चुकी है ये परिणाम

वाशिंगटन: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में अभी तक किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका है. सीनेट से लेकर हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव तक डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच अभी भी बहुमत को लेकर खींचतान जारी है. अमेरिका में ओलंपिक खेलों की तरह हर चार सालों में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होते हैं. वहीं राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद मिडटर्म चुनाव होते हैं. मिडटर्म इसलिए एक उपयुक्त नाम है, क्योंकि वे राष्ट्रपति के आधे कार्यकाल के बीत जाने के बाद होते हैं. उन्हें अक्सर राजनीतिक पंडितों द्वारा अगले राष्ट्रपति के लिए एक जनमत संग्रह के रूप में देखा जाता है.

सीनेट में दोनों पार्टियों को बराबर सीट

चुनाव के नतीजों को देखें तो 51 सदस्यीय सीनेट में दोनों पार्टियों ने अब तक 49 सीट जीती हैं. बता दें कि सीनेट के लिए हर राज्य से दो सदस्य होते हैं. वहीं हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव या निचले सदन में ट्रम्प की पार्टी डेमोक्रेट की 199 सीट के मुकाबले 211 सीटों के साथ आगे चल रही है. निचले सदन में अभी भी बहुमत से ट्रम्प की पार्टी 7 सीट पीछे है. आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अमेरिका में 1970 के बाद से कोई भी सत्ताधारी दल मिडटर्म चुनावों में बहुमत हासिल नहीं कर सका है. फिलहाल आ रहे नतीजे भी इसी प्रथा को बनाये रखने की ओर इशारा कर रहे हैं.

बाइडन खो देंगे सभी शक्तियां!

दोनों सदन हारने के बाद बाइडन की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. पिछले दो सालों से डेमोक्रेट पार्टी अपनी मनमर्जी से सदन को चला रही थी. ऐसी संभावना है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत हासिल करती है तो वह यूएस कैपिटल पर हमले की विस्तृत जांच को बाधित कर सकती है. साथ ही गर्भपात, स्वास्थ्य देखभाल और मतदान के अधिकार सहित विषयों पर रिपब्लिकन डेमोक्रेट के फैसले लागू नहीं होने देंगे.

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार हाउस कंजरवेटिव्स, पहले ही जो बाइडन के बेटे हंटर के चीन के साथ व्यापारिक संबंधों की सुनवाई का वादा कर चुके हैं. वे बाइडन प्रशासन की आव्रजन नीतियों, अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी और चीन में कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति पर भी गौर करना चाहते हैं. ऐसे में बहुमत जाते ही बाइडन की मुश्किलें बढ़नी तय हैं.

सरकार ठप पड़ने का खतरा!

कई मुद्दों पर डेमोक्रैट से असहमति और बजट में व्यापक कटौती के लिए अड़े रिपब्लिकन बाइडन के लिए सरकार चलाना मुश्किल कर सकते हैं. इन सब में सबसे बड़ा खतरा न्यायधीशों की नियुक्ति को लेकर बना हुआ है. उच्च न्यायलय में कंजरवेटिव जज बनाने के लिए ट्रम्प अगले राष्ट्रपति चुनाव तक इस प्रक्रिया को टाल सकते हैं. वहीं अमेरिका ने कभी भी अपने कर्ज में चूक नहीं की है.

हालांकि, वार्षिक खर्च कानून को मंजूरी देने में कांग्रेस की अक्षमता के कारण आंशिक सरकारी शटडाउन अधिक आम हो गए हैं. यह दो बार ट्रम्प प्रशासन के दौरान और एक बार राष्ट्रपति बराक ओबामा के अधीन हुआ. यदि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सरकारी खर्च के लिए एक बुनियादी ढांचे पर सहमत नहीं हुए, तो अगले साल के अंत तक एक और सरकारी शटडाउन अत्यधिक संभावित लगता है.

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