New Delhi: बैलिस्टिक डिफेंस शील्ड ने भारत को बनाया बाहुबली; चीन-पाक की मिसाइलें होंगी फुस्स

New Delhi: बैलिस्टिक डिफेंस शील्ड ने भारत को बनाया बाहुबली; चीन-पाक की मिसाइलें होंगी फुस्स

नई दिल्ली: भारत ने अपने डिफेंस को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) सिस्टम की इंटरसेप्टर मिसाइल के दूसरे चरण का पहला सफल परीक्षण किया है. आम तौर पर इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम को टू टियर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शील्ड भी कहा जाता है. दुनियाभर में जहां सभी देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइल की भरमार होती जा रही है तो वहीं इनसे निपटने के लिए एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम भारत की एक आवश्यकता बन गया था. दुनियाभर में महज चार देशों के पास मौजूद इस एंटी बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम को दो परतों में डिज़ाइन कर भारत ने अपनी सुरक्षा को बेहद मजबूत कर लिया है.


क्या है बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) सिस्टम

भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) कार्यक्रम का उद्देश्य सभी प्रकार की शत्रुतापूर्ण मिसाइलों, यहां तक ​​कि परमाणु मिसाइलों से भी वायु रक्षा कवच प्रदान करना है. बैलिस्टिक मिसाइल आमतौर पर लम्बी दूरी की मिसाइल होती हैं जो न्यूक्लियर वारहेड को अपने निशाने पर ले जाने में सक्षम होती हैं. ऐसी मिसाइल की मदद से दुश्मन अपने देश में बैठ कर हाइपरसोनिक स्पीड से किसी भी देश पर हमला बोल सकता है. ऐसे में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक रक्षा कवच प्रदान करता है, जो प्रमुख शहरों को ऐसे हमलों से बचाता है.


अब चीन और पाकिस्तान का क्या होगा?

कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास डीआरडीओ द्वारा 2000 के दशक के आसपास पाकिस्तान और चीन द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल के विकास को देखते हुए शुरू किया गया था. भारत को डर था कि पाकिस्तान कभी भी संघर्ष की स्थिति में देश के प्रमुख शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइल को दाग सकता है. ABM को बनाने के साथ ही भारत, अमेरिका, रूस और इजराइल के बाद चौथा ऐसा देश बन गया था, जिसके पास स्वदेशी उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम मौजूद है.


क्यों कहा जाता है टू टियर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शील्ड

इस समय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शील्ड के क्षेत्र में सबसे एडवांस रूप टू टियर डिफेंस शील्ड को माना जाता है, जो मिसाइल गिरने की गुंजाइश पर भी पूर्ण विराम लगा देता है. भारत का स्वदेशी बीएमडी कार्यक्रम टू टियर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शील्ड सिस्टम से लैस है, जो देश को 5 हजार किलोमीटर से आ रही किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल या लड़ाकू विमान से सुरक्षा प्रदान करता है. इसके दो प्रमुख पार्ट पृथ्वी एयर डिफेंस और एडवांस एयर डिफेंस है जो यह सुनिश्चित करते हैं कि निशाना किसी भी कीमत पर नहीं चूके.


पृथ्वी एयर डिफेंस

इस टू टियर डिफेंस शील्ड की पहली परत पृथ्वी एयर डिफेंस है, जो आसानी से 50-180 किलोमीटर की बाहरी-वायुमंडलीय ऊंचाई पर मिसाइलों को रोक और नष्ट कर सकता है. अधिक बात करें तो पृथ्वी वायु रक्षा (PAD) एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे वायुमंडल (एक्सो-एटमॉसफियर) के बाहर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए विकसित किया गया है. पृथ्वी मिसाइल पर आधारित, PAD दो चरणों वाली मिसाइल है, जिसकी अधिकतम अवरोधन ऊंचाई 80 किमी (50 मील) है.


PAD के पास 6174 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से 3,000 किमी (1,900 मील) दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता है, जो इसे मजबूत डिफेंस सिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा बना देता है.


एडवांस एयर डिफेंस

दूसरी परत कम ऊंचाई के अवरोधन के लिए एडवांस एयर डिफेंस (एएडी) मिसाइल है. एडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे 40 किमी (25 मील) की ऊंचाई पर एंडो-एटमॉसफियर में आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है. एएडी सिलिकॉनयुक्त कार्बन जेट वैन के साथ एक एकल चरण, ठोस ईंधन वाली मिसाइल है. साथ ही इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS), ग्राउंड-आधारित रडार और टर्मिनल चरण में सक्रिय रडार होमिंग से लेस होने के बाद यह सटीक निशाने पर जा लगती है.


7.5 मीटर लम्बी और 1.2 टन वजन की AAD का वर्ष 2018 में अब्दुल कलाम सेंटर से एक सफल परीक्षण किया गया, जहां 1500 किमी वर्ग की बैलिस्टिक मिसाइलों को इसने पलक झपकते ही नष्ट कर दिया था. ऐसे में PAD के असफल होने की स्थिति में भी AAD किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल को भारत की भूमि को छूने नहीं देगा.

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