लुफ्थांसा एयरलाइन ने Apple AirTag ले जाने पर रोक लगाई, जानिए क्या है वजह?

लुफ्थांसा एयरलाइन ने Apple AirTag ले जाने पर रोक लगाई, जानिए क्या है वजह?

नई दिल्ली, हवाई यात्रा के लिए खतरे का हवाला देते हुए लुफ्थांसा ने सामान के साथ ऐपल एयरटैग ले जाने पर रोक लगा दी है. बता दें कि एयरटैग हवाई यात्रियों के लिए रियल टाइम में अपने सामान को ट्रैक करने के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले डिवाइसों में से एक है. यह यात्रियों को उनके सामान को ट्रैक करने में उनकी मदद करता है. एयरटैग से यात्री सामान गुम हो जाने और यात्रा के दौरान एयरलाइन द्वारा सामान को गलत तरीके से संभाले जाने की जानकारी ले सकते हैं. लुफ्थांसा ने इंटरनेशनल सिविलियन एविएशन ऑर्गनाइजेशन ICAO के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए एयरटैग पर बैन लगाया है.


ऐपल इनसाइडर की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि एयरलाइन को एयरटैग पर प्रतिबंध की पुष्टि करने के लिए कहा गया था. इसके बाद लुफ्थांसा ने हाल के एक ट्वीट में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह एक्टिव एयरटैग को प्रतिबंधित कर रही है क्योंकि इसे खतरनाक डिवाइस के रूप कैटेग्राइज किया गया है.न किया जाए डिवाइस का इस्तेमाल

लुफ्थांसा ने एयरटैग्स पर बैन लगाने के लिए एयरलाइन दिशानिर्देशों का उल्लेख किया है. कंपनी ने कहा कि आईसीएओ दिशानिर्देशों के अनुसार बैगेज ट्रैकर्स खतरनाक सामान नियमों के अधीन हैं. इसके अलावा उनके ट्रांसमिशन फंक्शन के कारण, ट्रैकर्स को उड़ान के दौरान डीएक्टिवेट कर दिया जाना चाहिए. यदि वे चेक किए गए सामान में है, तो इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिएलिथियम-आयन बैटरी वाले डिवाइस का जिक्र

हालांकि, रिपोर्ट से पता चलता है कि लुफ्थांसा द्वारा ICAO के दिशानिर्देशों के कारण AirTag पर प्रतिबंध लगाने का दावा गलत है. लुफ्थांसा जिस रेगूलेशन के बारे में बात कर रही है, उसमें लिथियम-आयन बैटरी वाले डिवाइसों का उल्लेख है, जिसमें 15-इंच ऐपल मैकबुक प्रो जैसे बड़े डिवाइस शामिल हैं.


लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल नहीं करता डिवाइस

Apple का AirTag ऐसी बैटरी पर चलता है, जो तुलनात्मक रूप से बहुत छोटी है जिसे दिशानिर्देशों के तहत एक मुद्दा माना जा सकता है. AirTag CR2032 सेल का उपयोग करता है जो लिथियम-आयन बैटरी नहीं हैं और इसलिए नियमों के तहत नहीं आते हैं. यदि CR2032 सेल को उड़ानों के लिए हानिकारक माना जाता था.सामान को ट्रैक करने से रोकने का तरीका

कई रिपोर्टों से पता चलता है कि यह कदम लोगों को उनके खोए हुए सामान को ट्रैक करने से रोकने का एक तरीका हो सकता है. बता दें आए दिन एयरलाइंस के कुप्रबंधन के चलते सामान गुम होने के मामले सामने आते रहते हैं, जिसके चलते कई बार एयरलांइस को भी शर्मिंदगी भी उठानी पढ़ती है.

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